रिट के प्रकार – Indian Polity Laxmikanth Notes In Hindi For UPSC Exam

रिट के प्रकार – Indian Polity Laxmikanth Notes

मूल अधिकार – Indian Polity Laxmikanth Notes : संघ लोक सेवा आयोग में Laxmikanth आदिक महत्वपूर्ण होती है लेकिन इंटरनेट में आपको हिंदी में Laxmikanth नोट्स हिंदी में नहीं मिलते। तो हम आपको रिट के प्रकार – Indian Polity Laxmikanth Notes में प्रदान करते हैं|

रिट के प्रकार - Indian Polity Laxmikanth Notes

रिट के प्रकार

सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32 के तहत) और उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226 के तहत) बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा रिट जारी कर सकते हैं। ये रिट अंग्रेजी कानून से लिये गये हैं हैं।

उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय रिट के संबंध में भिन्न होते हैं।

उच्चतम न्यायालयउच्च न्यायालय
उच्चतम न्यायलय केवल मूल अधिकारों के क्रियान्वयन को लेकर रिट जारी कर सकते हैं।उच्च न्यायलय मूल अधिकारों के साथ साथ अन्य उद्देश्यों के लिये भी रिट जारी कर सकते हैं। उदाहरण के लियेः अन्य कानूनी अधिकार
यह भारत के पूरे क्षेत्र में जारी किया जा सकता हैयह क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के भीतर जारी किया जा सकता है
अनुच्छेद 32 के अंतर्गत, उपचार अपने आप में मूल अधिकार है। इसलिये उच्चतम न्यायालय अपने रिट न्यायक्षेत्र को नकार नहीं सकताअनुच्छेद 226 के तहत उपचार विवेकानुसार है इसलिए उच्च न्यायालय मना कर सकता है।

बन्दी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस )

  • यह एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है शरीर को प्रस्तुत किया जाये
  • -यह एक आदेश है जो एक अदालत हिरासत में लिए गए व्यक्ति के  लिए जारी करती  है।
  • यदि मामला अवैध पाया जाता है तो हिरासत में लिया गये व्यक्ति को मुक्त या स्वतंत्र किया जा सकता है।
  • बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट को निजी व्यक्तियों के साथ-साथ सार्वजनिक प्राधिकरणों के खिलाफ भी जारी किया जा सकता है
  • अपवाद: वैध बंदी

महत्वपूर्ण:


परमादेश (Mandamus)

  • इसका शाब्दिक अर्थ है –हम आदेश देते हैं
  • यह एक अदालत द्वारा सार्वजनिक अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए जारी किया जाता है।
  • यह निगमों, सार्वजनिक निकाय और अधीनस्थ न्यायालयों के खिलाफ जारी किया जा सकता है

प्रतिषेध (Prohibition)

  • शाब्दिक अर्थ है रोकना
  • यह उच्च न्यायालय द्वारा अधीनस्थ न्यायलयों को जारी किया जाता है।
  • ताकि अधीनस्थ न्यायलयों को उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर काम करने से रोका जा सके
  • जिस प्रकार परमादेश सीधे सक्रिय रहता है, प्रतिषेध सीधे सक्रिय नहीं रहता।।
  • प्रतिषेध संबंधी रिट सिर्फ न्यायिक एवं अर्द्ध न्यायिक प्राधिकरणों के विरुद्ध ही जारी किये जा सकते हैं। यह प्रशासनिक प्राधिकरणों विधायी निकायों एवं निजी व्यक्ति या निकायों के लिये उपलब्ध नहीं है।

उत्प्रेषण (Certiorari)

  • इसका शाब्दिक अर्थ प्रमाणित होना या सूचना देना।
  • इसे उच्च न्यायालय द्वारा अधीनस्थ न्यायलयों को जारी किया जाता है।
  • इसे अतिरिक्त न्यायिक क्षेत्र या न्यायिक क्षेत्र की कमी या कानून में खराबी के आधार पर जारी किया जा सकता है। ।
  • न्यायिक और अर्ध न्यायिक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी जारी किया जा सकता है।
  • इसके अंतर्गत विधायी निकायों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है

अधिकार पृच्छा (Quo warranto)

  • शाब्दिक अर्थ – प्राधिकृत या वारंट के द्वारा
  • इसे न्यायलय द्वारा किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक कार्यालय में दायर अपने दावे की जांच के लिये जारी किया जाता है।
  • यह मंत्री कार्यालय या निजी कार्यालय के मामलों में जारी नहीं किया जा सकता है।
  • अन्य चार रिटों के विपरीत, यह किसी भी इच्छुक व्यक्ति द्वारा जारी किया जा सकता है और इसके तहत यह जरूर नहीं है कि पीड़ित व्यक्ति ही इसे जारी करे।

अनुच्छेद 33 संसद को सशस्त्र बलों, अर्ध-सैन्य बलों, पुलिस बलों, खुफिया एजेंसियों और अनुरूप बलों के सदस्यों के मौलिक अधिकारों को प्रतिबंधित या निरस्त करने का अधिकार देता है। इस प्रावधान का उद्देश्य उनके कर्तव्यों के उचित निर्वहन और उनके बीच अनुशासन के रखरखाव को सुनिश्चित करना है

प्रश्न: राष्ट्रीय आपातकाल और मार्शल लॉ में क्या अंतर है?

राष्ट्रीय आपातकालमार्शल लॉ(सैन्य कानून)
केंद्र और राज्य के संबंधों के साथ व्यक्तियों के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैंकेवल मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं
यह सरकार एवं सामान्य कानूनी न्याय को जारी रखता हैइसके अंतर्गत सरकार निलंबित हो जाती है ।
यह सिर्फ तीन आधारों पर ही लागू हो सकता है- युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोहयह कानून एवं व्यवस्था के भंग होने पर उसे दोबारा निर्धारित करता है
पूरे देश या उसके एक हिस्से पर आरोपितदेश के विशिष्ट क्षेत्र पर लागू
संविधान में स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैंकोई विशेष प्रावधान नहीं
  • मार्शल लॉ अवधारणा अंग्रेजी सामान्य कानून से ली गई है।
  • इसका सीधा मतलब है कि सैन्य शासन जहां नागरिक प्रशासन सैन्य अधिकारियों द्वारा चलाया जाता है।
  • यह संविधान के अनुच्छेद 34 में निहित है



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